चारें से लेकर खल चोकर के दाम छू रहे आसमान,पशुओं का पेट भरना हो रहा मुस्किल


चारें से लेकर खल चोकर के दाम छू रहे आसमान,पशुओं का पेट भरना हो रहा मुस्किल

बेचारा किसान , चारें से लेकर खल चोकर के दाम छू रहे आसमान,पशुओं का पेट भरना हो रहा मुस्किल। इंसानों की रोजमर्रा की जरूत के सामान पर तो पहले ही फन फैलस ही रखा है। लेकिन अब तो जानवरों के खान पान पर भी मंहगाई कुंडली मार कर बैठ गई हैं। भूसा व अन्य चारे के मूल्य भी आसमान छूने लगा है। इसके चलते अधिकांश पशुपालकों ने पशु पालन का मोह छोड़ लेने का मन बना लिया है। गांव के साथ शहरी क्षेत्रों में शुद्ध घी व दूध के लिए लोगों ने भैंस को पालने का चलन अरसे से चला रहा है। वहीं कुछ लोगों ने भैंस पालकर दूध बेचने का काम कर रखा है। अब आकर इस पर भी महंगाई का ग्रहण लगता जा रहा है। भूसे का भाव सीजन में 300 रूपये से 400रूपये तक प्रति क्विटल था। अब इसी भूसे पर इतनी महंगाई सवार हो चुकी है। वर्तमान समय में इस भूसे का भाव 700 रूपये प्रति क्विटल हो गया है । ऐसा ही हरे चारे पर भी महंगाई हावी है। इस बढ़ती महंगाई में इंसान अपना व बच्चों का पेट तो बड़ी मुश्किल से भर पा रहा है। तो वह महंगाई में मवेशी कैसे पालें। चारे की तलाश में भटकते है सड़कों पर मवेशी चारे की महंगाई का ही असर है कि शहर से लेकर गांव तक की सड़कों पर आवारा पशुओं के साथ घरेलू दुधारू मवेशियों की संख्या बढती जा रही है। इनमें से गायों की संख्या सबसे ज्यादा दिखाई पड़ती है। जिनकों आज अपना पेट भरने के लिए दर दर सड़कों आवारा पशुओं की भांति भटकना पड़ रहा है। जो कूड़ा व कचरे से अपना पेट भर रहे है।

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