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post authorसमादक दीपक 10 January 2020, 05:46:00 PM

कैब और ऑटो चालकों को जेएनयू कैंपस में जाने से लग रहा हे डर


कैब और ऑटो चालकों को जेएनयू कैंपस में जाने से लग रहा हे डर

नई दिल्ली नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में 05 जनवरी की रात हुई हिंसा के बाद कई कैब और ऑटोरिक्शा चालक छात्र-छात्रों को जेएनयू कैंपस से लेने या उन्हें छोड़ने जाने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। कई छात्रों ने बताया कि कैब और ऑटोरिक्शा चालक जेएनयू के हालात का हवाला देते हुए यहां आने-जाने से मना कर रहे हैं। जेएनयू की छात्रा देबोमिता चटर्जी ने कहा कि हम विरोध-प्रदर्शन के लिए जेएनयू से मंडी हाउस जाना चाहते थे, लेकिन कैब और ऑटो चालकों ने विश्वविद्यालय परिसर में आने से मना कर दिया। उन्होंने हमें हमारे हॉस्टल से दूर अरुणा आसफ अली मार्ग के निकट टी-प्वाइंट पर आने के लिए कहा। उन्हें और अन्य तीन विद्यार्थियों को भी काफी दूर तक चलकर जाना पड़ा, इसके बाद ही उन्हें कोई साधन मिल पाया। उन्हें इस बीच नॉर्थ गेट से आगे दोनों छोरों पर भारी बैरिकेडिंग से भी बहुत दिक्कत हुई। कई अन्य छात्रों का कहना है कि कैब चालक को जैसे ही पता चलता है कि उन्हें छात्रों को लेने या छोड़ने के लिए जेएनयू जाना है, वह यात्रा रद्द कर देते हैं। नाम न जाहिर करने की शर्त पर एक कैब चालक ने कहा कि ऐसा नहीं है कि हम यात्रियों को पहले छोड़ने या लेने नहीं जाते थे, लेकिन जेएनयू में स्थिति ऐसी है कि हम खतरा मोल नहीं ले सकते हैं, तब क्या होगा जब हमारे गाड़ी को कोई नुकसान पहुंचाने लगे। विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के मुख्य दरवाजे से दूर कैब लेते हुए देखा गया और कई चालकों का कहना है कि जेएनयू या इसके निकट वाहनों को नहीं ले जाने के पीछे सुरक्षा की चिंता मुख्य कारण है। हौज खास से जेएनयू परिसर जाने को कहने पर कुछ ऑटो चालक सीधे तौर पर मना कर देते हैं या अपने वाहन को तेज करके निकल जाते हैं। एक ऑटोरिक्शा चालक सतपाल ने कहा कि वहां हालात अच्छे नहीं हैं, इसलिए मैं खतरा मोल नहीं ले सकता। मैं एक गरीब ऑटोवाला हूं। मुझे रोजी-रोटी जुटानी पड़ती है, इसलिए मुझे सतर्क रहना पड़ता है। जेएनयू में स्थिति कभी भी बदल सकती है। कौन जानता था कि रविवार को स्थिति इतनी डरावनी हो जाएगी। वहीं, एक अन्य चालक दलजीत सिंह ने कहा कि वह यात्रियों को विश्वविद्यालय परिसर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि जब हिंसक घटना हुई तो मेरा भाई परिसर में मौजूद था। वह कुछ देर तक फंसा रहा, लेकिन मैं किसी को विश्वविद्यालय ले जाने से मना नहीं कर रहा हूं क्योंकि मैं कुछ साल पहले बेरसराय क्षेत्र में रहा हूं इसलिए मैं इस स्थान को जानता हूं। मुझे कोई डर नहीं है। गौरतलब है कि 05 जनवरी को कुछ नकाबपोश हमलावरों ने जेनयू कैम्पस में घुसकर छात्रों और शिक्षकों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था

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