हरियाणा भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अध्यक्ष सुभाष बराला ने नयी शिक्षा नीति लाने के लिए भारत सरकार को धन्यवाद दिया


हरियाणा भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अध्यक्ष सुभाष बराला ने नयी शिक्षा नीति लाने के लिए भारत सरकार को धन्यवाद दिया

फतेहाबाद (टोहाना) 1 अगस्त। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला ने नयी शिक्षा नीति का स्वागत करते हुए कहा है कि यह नीति मनुष्य निर्माण की नीति है। उन्होंने कहा कि हम सब देश वासी केंद्र सरकार द्वारा घोषित नयी शिक्षा नीति 2020 का स्वागत और अभिनंदन करते हैं। उन्होंने नयी शिक्षा नीति लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का आभार प्रकट किया और कहा कि यह नीति भारतीय संस्कृति, गौरवशाली इतिहास की नींव पर आधारित है। यह नीति सर्व स्पर्शी और सर्व समावेशी है, इसमें प्राचीनता और नवीनता का सम्मिश्रण है सुभाष बराला ने कहा कि नयी शिक्षा नीति में राष्ट्रीयता और क्षेत्रीयता दोनों का समावेश है। राष्ट्रीय एकात्मता को मजबूत करने वाली माटी की सुगंध से युक्त है यह शिक्षा नीति है। उन्होंने कहा कि विज्ञान के साथ कला और संगीत को जोड़ा गया है। अब विज्ञान और तकनीक से जुड़े विद्यार्थी भी कला की शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि तीन दशक के बाद बहु प्रतीक्षित नई शिक्षा नीति का स्वप्न अब साकार हुआ है। कक्षा 5 तक की शिक्षा को क्षेत्रीय भाषाओं में अनिवार्य करने से क्षेत्रीय भाषाओं का विकास होगा। नये अवसर उपलब्ध होंगे। देश भर से प्राप्त लाखों सुझाओं पर आधारित यह एक बेहतरीन शिक्षा नीति है सुभाष बराला ने कहा कि कक्षा 6 से ही बच्चों में प्रकृति प्रदत्त हुनर को विकसित करने की दृष्टि से वोकेशनल एजुकेशन से जोडऩे का प्रावधान किया गया है। बुनियादी शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा के लिए व्यावहारिक और युगानुकूल बदलाव किये गये हैं। इससे सामाजिक जीवन में सम्मान का भाव बढ़ेगा। इतना ही नहीं, उच्च शिक्षा में सरकार ने 3.5 करोड़ नयी सीटें बढ़ाने का प्रावधान किया है। शिक्षा बजट को जीडीपी के 6 प्रतिशत तक बढ़ाने की बात कही गयी है पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षकों के पाठ्यक्रम, नामांकन की प्रक्रिया में भी व्यावहारिक बदलाव किये गये हैं। विभिन्न विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में नामांकन के लिए एकीकृत परीक्षा का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि ज्ञान के आज के युग में जब सीखना, अनुसंधान और नवसृजन करना बहुत जरूरी हो गया है, तो ऐसे में इस शिक्षा नीति से भारत ज्ञान के जीवंत केंद्र के रूप में उभर कर सामने आएगा और यह नीति भारत को श्रेष्ठ बनाने की दिशा में काम

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