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post author 01 September 2020, 09:53:00 PM

एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी एजीआर की बकाया रकम चुकाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संचार कंपनियों को दस साल की मोहलत दी


एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी एजीआर की बकाया रकम चुकाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संचार कंपनियों को दस साल की मोहलत दी

नई दिल्ली। एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी एजीआर की बकाया रकम चुकाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संचार कंपनियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने संचार कंपनिय़ों को 10 साल की मोहलत दे दी है। यानी कंपनियां अब दस साल के भीतर एजीआर चुका सकती हैं। इसकी समय सीमा एक अप्रैल 2021 से शुरू होगी। संचार कंपनियां इसके लिए 15 साल का समय की मांग कर रही थीं और अदालत उन्हें ज्यादा समय देने को राजी नहीं थी। पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों को दस साल का समय दिया। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अगर कंपनियां इस दौरान भुगतान करने में देरी करती हैं या डिफॉल्ट होता है तो उन्हें ब्याज और जुर्माना भी देना होगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, एजीआर की कुल रकम का 10 फीसदी हिस्सा 31 मार्च 2021 तक चुकाना होगा। इसके साथ ही हर साल सात फरवरी को संचार कंपनियों को एजीआर की तय रकम का भुगतान करना होगा। अदालत ने इसके साथ ही यह भी कहा है कि इस बकाए का फिर से कोई आकलन नहीं किया जाएगा। यानी जो रकम आज तय है, वहीं रकम भरनी होगी। इससे पहले सरकार संचार कंपनियों को 20 साल तक एजीआर की रकम चुकाने की समय सीमा देने पर विचार कर रही थी। एजीआर की सबसे ज्यादा बकाया रकम वोडाफोन आइडिया पर है। इस कंपनी पर कुल 50 हजार चार सौ करोड़ रुपए बाकी है। भारती एयरटेल पर 26 हजार करोड़ रुपए बाकी है। इससे पहले वोडाफोन आइडिया ने कहा था कि एजीआर की रकम तत्काल भरने का अगर दबाव बनाया गया तो कंपनी बंद भी हो सकती है। हालांकि अदालत के फैसले के बाद कई संचार कंपनियां एजीआर भरने से बच गई हैं। ये कंपनियां या तो किसी और के साथ मिल गई हैं या फिर बंद हो चुकी हैं। इन कंपनियों के ऊपर कुल 1.6 लाख करोड़ रुपए एजीआर का बकाया है।

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