किसानों को हुए नुकसान की विशेष गिरदावरी के माध्यम से की जाएगी भरपाई: डीसी कहा, विभिन्न फसलों की गिरदावरी को लेकर सरकार ने जारी किए आदेश


किसानों को हुए नुकसान की विशेष गिरदावरी के माध्यम से की जाएगी भरपाई: डीसी
कहा, विभिन्न फसलों की गिरदावरी को लेकर सरकार ने जारी किए आदेश

हिसार, 14 सितंबर। फसलों को हुए नुकसान की स्पेशल गिरदावरी करवाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे किसानों ने आज लघु सचिवालय स्थित जिला सभागार में उपायुक्त डॉ. प्रियंका सोनी से मुलाकात की। उपायुक्त ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा सरकार को स्पेशल गिरदावरी करवाने की अनुमति के लिए पत्र लिखा गया था। सरकार की ओर से स्पेशल गिरदावरी के आदेश दे दिए गए हैं। उपायुक्त ने सरकार से मिले पत्र की प्रति किसानों को सौंपी जिसके बाद किसानों ने धरना समाप्त करने की घोषणा की। किसान प्रतिनिधियों तथा जिला प्रशासन के बीच चली लगभग एक घंटे की वार्ता के दौरान किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को रखा गया जिनके बारे में उपायुक्त डॉ. प्रियंका सोनी ने क्रमवार जवाब दिए। इससे किसान नेता संतुष्ट दिखे। उपायुक्त ने कहा कि विशेष गिरदावरी के आदेश होने के बाद किसानों के एक-एक रकबे का सर्वे करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सफेद मक्खी से कपास फसल को काफी नुकसान हुआ था, अब सरकार से आदेश मिलने के बाद बर्बाद हुई कपास की फसल की स्पेशल गिरदावरी करवाई जाएगी। इसके साथ ही जलभराव से खराब हुई गन्ना, धान व अन्य फसलों की भी स्पेशल गिरदावरी करवाई जाएगी। इस संबंध में जिला प्रशासन को सरकार से दो अलग-अलग पत्र प्राप्त हुए हैं। उपायुक्त ने कहा कि बहुत से मुद्दों पर भ्रांतियां फैली हुई थी जो दूर हो गई हैं। बैठक के दौरान उपायुक्त ने कृषि उपनिदेशक डॉ. बलवंत सहारण को निर्देश दिए कि स्पेशल गिरदावरी से पूर्व गांव में मुनादी करवाई जाए और गिरदावरी करने वाली टीम के साथ गांव के नंबरदार सहित किसानों को भी शामिल किया जाए। किसानों को विश्वास में लेकर ही गिरदावरी करवाई जाए। इसी प्रकार क्रोप कटिंग के दौरान भी सर्वे टीम के साथ नंबरदार को साथ भेजा जाए तथा ग्रामीणों को भी साथ लिया जाए। उपायुक्त ने किसानों से बातचीत में स्पष्ट किया कि गिरदावरी व स्पेशल गिरदावरी में अंतर है। फसल बिजाई के समय पटवारी द्वारा गिरदावरी करके यह विवरण दर्ज किया जाता है कि किस किसान ने अपने खेत में कौन सी फसल बोई है। आजकल यह कार्य मेरी फसल-मेरा ब्यौरा के माध्यम से किसान स्वयं भी कर रहे हैं। जब किसी प्राकृतिक आपदा से फसल में नुकसान होता है तो प्रशासन द्वारा नुकसान का रफ एस्टीमेट बनाकर सरकार के पास भेजा जाता है जिसके बाद सरकार द्वारा स्पेशल गिरदावरी करवाने के आदेश दिए जाते हैं। उपायुक्त ने बताया कि प्रशासन लोगों की बात सुनने और उनकी भलाई के लिए होता है। किसानों को जो भी दिक्कत हो, उसके समाधान के लिए वह सीधे प्रशासन से बात करें और किसी के बहकावे में न आएं। किसान अन्नदाता है जो सबका पेट भरता है। प्रशासन का प्रयास रहता है कि किसान को फसल नुकसान का अधिक से अधिक मुआवजा मिले। सरकार का प्रयास है कि कोरोना के कारण अन्य क्षेत्रों की तरह कृषि क्षेत्र मंदी की चपेट में न आए। उपायुक्त ने कहा कि आजकल कोरोना के मामले काफी बढ़े हुए हैं और इसके प्रति लापरवाही काफी खतरनाक हो सकती है। उन्होंने कहा कि धरना देने के लिए अधिक संख्या में किसानों के एकत्र होने से कोरोना का खतरा बढ़ सकता है। उन्हें फसलों का मुआवजा तो मिल जाएगा लेकिन यदि कोई व्यक्ति या परिवार एक बार कोरोना की चपेट में आ गया तो उसकी भरपाई करनी मुश्किल हो जाएगी। उपायुक्त के आवश्वासन के बाद ग्रामीणों ने सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई बातचीत के लिए उनका आभार व्यक्त किया और धरनारत किसानों को समझाकर धरना समाप्त करने की बात कही।

You might also like!

Leave a Comment

Ads
Ads
Ads