राजनीति

post author 04 March 2020, 06:08:00 PM

कांग्रेस ने मंत्रियों और भाजपा ने विधायकों को समझाया


कांग्रेस ने मंत्रियों और भाजपा ने विधायकों को समझाया

दरअसल मध्यप्रदेश में आगामी दिनों मध्यप्रदेश विधानसभा के दो उपचुनाव होना हैं। इसके पहले 3 सीटों के लिए राज्यसभा के चुनाव होना है, साथ ही 16 मार्च से विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो रहा है। इन तमाम मोर्चों पर दोनों ही दलों के विधायक कसौटी पर रहेंगे। यही कारण है कि दोनों दलों में दुरुस्ती का दौर चल रहा है। भाजपा ने 2 और 3 मार्च को संभागीय बैठकर आयोजित करके विधायकों से रायशुमारी की। विधानसभा सत्र के लिए तैयारियों से आने को कहा। राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान सतर्कता और सजगता से करने के लिए कहा। विधायकों की बैठक में गोपाल भार्गव, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, संगठन महामंत्री सुहास भगत विशेष रूप से उपस्थित रहे। 2 दिन चली बैठकों में जो विधायक नहीं आ पाए उन्होंने इसके लिए प्रदेश नेतृत्व से अनुमति ली। केवल नारायण त्रिपाठी और शरद कौल बिना किसी सूचना के बैठक से अनुपस्थित रहे। दोनों ही विधायक एक बार विधानसभा के अंदर कांग्रेस का पक्ष ले चुके हैं। शरद कौल का हाल ही में एक वीडियो भी जारी हुआ जिसमें वे भाजपा के राष्ट्रीय-प्रादेशिक नेतृत्व की आलोचना करते हुए दिखे। वहीं मुख्यमंत्री कमलनाथ की तारीफ करते रहे। माना यही जा रहा है कि यह दोनों विधायक शायद ही भाजपा के साथ आ पाएं। उधर कांग्रेस में प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने वीआईपी गेस्ट हाउस में लगभग 13 मंत्रियों से चर्चा की। जिन मंत्रियों से चर्चा की उनमें डॉक्टर गोविंद सिंह, विजयलक्ष्मी साधो, बृजेंद्र सिंह राठौर, सज्जन सिंह वर्मा, हर्ष यादव, जयवर्धन सिंह, प्रियव्रत सिंह, ओमकार सिंह मरकाम, उमंग सिंगार, कमलेश्वर पटेल, बाला बच्चन, हुकुम सिंह कराड़ा, प्रदीप जायसवाल, आरिफ अकील और सचिन यादव शामिल थे। शेष बचे मंत्रियों की मुलाकात आज होगी। सिंधिया समर्थक मंत्री मंगलवार को ग्वालियर में एक शादी समारोह में थे। इस कारण इनमें से किसी की मुलाकात नहीं हो पाई। कुल मिलाकर भोपाल से दिल्ली तक राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जहां दिल्ली में हैं वहीं मंत्री जीतू पटवारी और जयवर्धन भी मंगलवार की शाम को दिल्ली पहुंच गए जबकि भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मंगलवार की शाम दिल्ली रवाना हो गए जहां वे प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रम पर राष्ट्रीय नेतृत्व से चर्चा करेंगे। कुल मिलाकर पिछले कुछ दिनों से ऑपरेशन लोटस की चर्चाओं के बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा भाजपा पर कांग्रेसी विधायकों को खरीदने के लगाए गए आरोपों के बाद भोपाल से दिल्ली तक दोनों ही दलों में राजनैतिक उथल-पुथल मची हुई है और इसी के तहत दोनों ही दलों ने सतर्कता बरतनी शुरू कर दीहै। कांग्रेस ने मंत्रियों को और भाजपा ने विधायकों को आगामी चुनाव के लिए दुरुस्त किया है।

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